Defence Sector : पिछले कुछ सालों में भारत सरकार ने डिफेंस बजट में लगातार बढ़ोतरी की है। 2025 में अनुमानित कुल निवेश 1.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। समुद्री सुरक्षा, ग्लोबल ट्रेड रूट्स की मजबूती और डिफेंस एक्सपोर्ट के टार्गेट इस वृद्धि के मुख्य कारण हैं। भारत का लक्ष्य 2029 तक डिफेंस सेक्टर के एक्सपोर्ट को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। इन योजनाओं का सीधा फायदा शिपबिल्डिंग कम्पनियों को मिलने वाला है ।
Mazagon Dock Shipbuilders
Mazagon Dock Shipbuilders देश की पहली सरकारी शिपयार्ड है, जिसे “नवरत्न” का दर्जा मिला है। कंपनी नेवी के लिए डेस्ट्रॉयर और सबमरीन दोनों बनाती है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (Q2FY26) में Mazagon Dock Shipbuilders का टोटल इनकम 3,199.87 करोड़ रुपये रही, जिसमें 6.3% सालाना ग्रोथ दर्ज की गई। वहीं नेट प्रॉफिट 749.48 करोड़ रुपये तक रहा, जिसमें साल-दर-साल 28.1% की बढ़ोत्तरी थी। कंपनी का मार्केट कैप अभी लगभग 1,12,966 करोड़ रुपये है और PB रेशियो 15.5 है ।
Garden Reach Shipbuilders
Garden Reach Shipbuilders (GRSE) भारतीय नेवी और कोस्ट गार्ड के लिए प्रमुख युद्धपोत निर्माता है। कंपनी ने अब तक 111 युद्धपोत डिलीवर किए हैं। वित्त वर्ष 2025 में GRSE की कुल आय 5,411 करोड़ रुपये रही और इस दौरान ग्रोथ रेट 39% रहा। Q4FY25 में कंपनी का रेवेन्यू 1,642 करोड़, EBITDA 335 करोड़ और नेट प्रॉफिट 244 करोड़ रुपये रहा, यानी सालाना आधार पर प्रॉफिट में 118% ग्रोथ दर्ज की गई। कंपनी का मार्केट कैप 33,083 करोड़ रुपये है ।
Cochin Shipyard की विस्तार योजनाएं और फाइनेंशियल डेटा
Cochin Shipyard देश की प्रमुख शिपबिल्डिंग और शिप रिपेयर कम्पनी है। Q2 FY25-26 में कंपनी का रेवेन्यू 1,245.88 करोड़ रुपये, नेट प्रॉफिट 107.53 करोड़ रुपये और EBITDA 200.96 करोड़ रुपये रिपोर्ट किया गया। कंपनी ने हाल ही में ग्लोबल मार्केट में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए कोलंबो डॉकयार्ड को 4.5 बिलियन रुपये में अधिग्रहीत किया है।
Cochin Shipyard का ऑर्डर बुक FY26 के अंत तक 500 अरब रुपये तक पहुंच सकता है, जिसमें अगले 4 वर्षों की रेवेन्यू विसिबिलिटी दिखती है। कंपनी की पोजीशन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत हो रही है और इसके कई हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है ।
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डिफेंस सेक्टर के लिए भविष्य के अवसर
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, डिफेंस सेक्टर में अगले कुछ सालों में नौसेना को आधुनिक बनाने, ग्रीनफील्ड पोर्ट्स बनाने और भारी स्तर पर शिप रिपेयरिंग के कार्य होंगे। सात हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट्स जिनकी कुल लागत लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये है, उनके लिए मंजूरी दी जा चुकी है। इसके अलावा, गवर्नमेंट द्वारा रणनीतिक पार्टनरशिप के तहत South Korea की HD KSOE कंपनी के साथ Cochin Shipyard ने नया समझौता भी किया है, जिससे मर्चेंट शिपबिल्डिंग में नई टेक्नोलॉजी और क्षमता मिलेगी ।
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